
हम जो खाते हैं वह हमारे रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर को प्रभावित कर सकता है। उच्च रक्त शर्करा (High Blood Sugar) टाइप 2 मधुमेह (Diabetes) का कारण बन सकता है। इसलिए अपने खाने पर नियंत्रण रख कर हम अपने शुगर लेवल्स को मेनेज कर सकते हैं।
डाईबिटीज़ के मरीज़ कई फल खा सकते हैं जो रक्त शर्करा को नहीं बढ़ाते व फाइबर से भरपूर होते हैं। इनमेसे कुछ औषधि का लिस्ट हमने तैयार किया है। और हम ईर पोस्ट मे आपको इन के बारेमे बताएँगे।
11 Best Herbs to Control Diabetes and Lower Blood Sugar

1. जामुन (Jamun)

- जामुन के रस में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। इसमें मौजूद एसिड यौगिक भोजन को स्टार्च में बदलने की गति को धीमा कर देते है, इससे डाईबिटीज़ का स्तर नियंत्रित रहता है।
- जामुन का रस इंसुलिन संवेदनशीलता और गतिविधि दोनों को बढ़ाता है।
- इसके जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Glycemic index) कम होता है, जिससे डायबिटीज पेशेंट को अतिरिक्त फायदा मिलता है।
- जामुन के रस और आम के रस को बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से भी शुगर में फायदा मिलता है।
- जामुन की पत्तियों को नीम और मेथीदाना के साथ उबाल कर सेवन करने से भी डायबिटीज का स्तर कम होता है।[1]
2. आंवला (Gooseberry)

आंवले में क्रोमियम तत्व पााए जाते हैं, यह इंसुलिन हार्मोन को मजबूत कर खून में आपके शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है. इसके अंदर मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है इससे भी आपका डायबिटीज नियंत्रण में रहता है. आंवला वैसे तो कई चीजों में कारगर रहता है.[2]
- ताज़ा आंवला खाना, शायद इसके सेवन का सबसे बेस्ट तरीका है। यह स्वाद में हल्का मीठा, खट्टा और कसैला होता है। इसे खाने के बाद आप तुरंत पानी पी सकते हैं।
- ताज़ा फल आपको पसंद नहीं, तो इसका जूस भी पिया जा सकता है।
- आंवले का मुरब्बा काफी पॉपुलर खाने की चीज़ है, जो भारत के हर कोने में आपको मिल जाएगा।
- आंवले का पाउडर भी बाज़ार में आसानी से मिल जाता है। एक चम्मच आंवला पाउडर पानी के साथ पी सकते हैं।[3]
3. करेला (Bitter gourd)

इसके संभावित एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-डायबिटिक गुणों के परिणामस्वरूप, करेला (बिटर गॉर्ड) के अर्क को पारंपरिक रूप से वनस्पति इंसुलिन के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। इसके एंटीडायबिटिक प्रभावों का परीक्षण करने के लिए जानवरों और मनुष्यों दोनों का इस्तेमाल किया गया है। एक एनिमल मॉडल में परीक्षण किए जाने पर, प्राकृतिक उत्पाद मैश और बीज सहित पूरे पौधे ने संभावित एंटीडायबिटिक गुण दिखाया। इसका प्राकृतिक उत्पाद डायबिटीज को प्रभावित करता पाया गया। यह या तो इंसुलिन के रिलीज़ को नियंत्रित कर सकता है या ग्लूकोज के पाचन में बदलाव ला सकता है।
करेले (बिटर गॉर्ड) में पाए जाने वाले रसायनों में ग्लाइकोसाइड, चारेंटिन, विसाइन, कराविलोसाइड और पॉलीपेप्टाइड-पी (प्लांट इंसुलिन) शामिल हैं। लीवर, फैट और मांसपेशियों की कोशिकाओं में ग्लूकोज तेज और ग्लाइकोजन संश्लेषण को बढ़ाकर, ये रसायन ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकते हैं। डायबिटीज जैसी गंभीर स्थितियों के उचित निदान और उपचार के लिए कृपया डॉक्टर से सलाह लें। कृपया खुद से कोई दवा न करें।[4]
4. तुलसी (Basil)

पवित्र तुलसी (Holy basil), जिसे तुलसी के नाम से भी जाना जाता है, भारत की मूल जड़ी-बूटी है। आयुर्वेद में इसे बहुत महत्वपूर्ण पौधा माना जाता है। आज, यह दुनिया भर में उगाया जाता है और इसका सेवन भोजन के रूप में या पूरक (supplement) के रूप में किया जा सकता है। इस पौधे के सभी भाग: पत्तियाँ, तना, बीज और तेल औषधीय रूप से उपयोग किए जाते हैं। यह मधुमेह टाइप 1 और टाइप 2 दोनों प्रकार की स्थितियों में रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करने के लिए जाना जाता है।[5]
5. नीम (Neem)

नीम एक उष्णकटिबंधीय (Tropical) पौधा है जो आमतौर पर भारत में पाया जाता है। यह प्राचीन काल से ही भारतीय औषधीय पद्धतियों का एक अभिन्न अंग रहा है। इसकी पत्तियों से लेकर जड़ों तक, इस स्वस्थ जड़ी बूटी के हर हिस्से का उपयोग सूजन, त्वचा रोग, दंत विकार, बुखार आदि सहित विभिन्न बीमारियों से पीड़ित रोगियों के इलाज के लिए किया जाता है। इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, नीम या एज़ाडिरेक्टा इंडिका रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।[6]
6. बेल पत्र (Bael Patra)

बेल फल के अर्क का मौखिक सेवन या इंजेक्शन रक्त शर्करा और हीमोग्लोबिन से जुड़े ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है। यह रक्त में इंसुलिन के स्तर को बढ़ाने में भी मदद कर सकता है और यकृत में ग्लूकोज के रूपांतरण में मदद कर सकता है। बेल फल के अर्क में मौजूद कुछ यौगिक (कौमारिन) यकृत से इंसुलिन के स्राव में मदद कर सकते हैं, इस प्रकार सहायक हो सकते हैं रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में।[7]
7. मेथी (Fenugreek)

मेथी के बीज (Fenugreek seeds / trigonella foenum graecum) घुलनशील फाइबर में उच्च होते हैं, जो कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण को धीमा करके रक्त शर्करा को कम करने में मदद करते हैं। इससे पता चलता है कि वे मधुमेह वाले लोगों के इलाज में प्रभावी हो सकते हैं।
मेथी के संभावित मधुमेह विरोधी लाभों की जांच के लिए कई अध्ययन किए गए हैं।
इनमें से, कई नैदानिक परीक्षणों से पता चला है कि मेथी के बीज रक्त शर्करा के स्तर को कम करके और ग्लूकोज सहनशीलता में सुधार करके मनुष्यों में टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों से जुड़े अधिकांश चयापचय लक्षणों में सुधार कर सकते हैं।
एक अध्ययन में, हमारे देश भारत के शोधकर्ताओं ने पाया कि इंसुलिन-निर्भर (टाइप 1) मधुमेह वाले मरीजों के दैनिक आहार में 100 ग्राम डीफ़ैटेड मेथी बीज पाउडर जोड़ने से उनके उपवास रक्त ग्लूकोज के स्तर में काफी कमी आई, ग्लूकोज सहनशीलता में सुधार हुआ और कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल भी कम हो गया। या ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स।[8]
8. गिलोय (Giloy)

कई विशेषज्ञों का मानना है कि गिलोय के अर्क में हाइपोग्लाइसेमिक और मधुमेह विरोधी गुण हो सकते हैं। इंसुलिन एक पेप्टाइड हार्मोन है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।
गिलोय, आयुर्वेदिक जड़ी बूटी, शरीर को प्राकृतिक रूप से इंसुलिन बनाने में मदद कर सकती है, जो मधुमेह के प्रबंधन में फायदेमंद हो सकती है। इसके अतिरिक्त, गिलोय पाचन तंत्र और आंत के स्वास्थ्य को बढ़ा सकता है, जिससे मधुमेह प्रबंधन में मदद मिलती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि पाचन स्वास्थ्य यह निर्धारित करता है कि हमारा शरीर भोजन से पोषक तत्वों को कितनी कुशलता से अवशोषित करता है।[9]
9. कुटकी (Kutki)

कुटकी का स्वाद कड़वा होता है। इसके लिए डायबिटीज के मरीज भी कुटकी का सेवन कर सकते हैं। इसके सेवन से शुगर कंट्रोल में रहता है। इसके लिए रोजाना दूध के साथ कुटकी के पत्तों अथवा जड़ों के अर्क का सेवन कर सकते हैं। एक शोध में खुलासा हो चुका है कि सुबह के समय दूध पीना डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण औषधि की तरह काम करता है। हालांकि, कुटकी सेवन करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।[10]
10. गुड़मार (Gudmar)

गुड़मार विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य-समृद्ध यौगिकों से युक्त है, जैसे जिमनेमिक एसिड ए, बी, सी और डी के ट्राइटरपेनॉइड सैपोनिन, गैलेक्टुरोनिक एसिड, फेरुलिक और एंजेलिक एसिड। केवल ताजी पत्तियों को चबाने से स्वाद कलिकाओं पर सैपोनिन के प्रभाव के कारण स्वाद कलिकाएँ अस्थायी रूप से निष्क्रिय हो सकती हैं।
गुड़मार के असाधारण मधुमेह-विरोधी गुण इसे रक्त शर्करा की वृद्धि को कम करने और चयापचय सिंड्रोम पर काबू पाने में प्रभावी बनाते हैं। यह भोजन के प्रति इंसुलिन प्रतिक्रिया में सुधार करता है, जिससे इंसुलिन और/या मौखिक हाइपोग्लाइसेमिक दवाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।[11]
11. विजयसार (Vijaysar)

ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में आयुर्वेद गुरु मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए विजयसार की लकड़ी के ब्लॉक या टुकड़ों का उपयोग करते थे। इसे रक्त शर्करा के स्तर को प्रबंधित करने का एक समय-परीक्षणित तरीका कहा जाता है। आजकल यह पाउडर, टैबलेट और सप्लीमेंट के रूप में आसानी से उपलब्ध है।[12]
इन सबको खरीदना और इन सबका सेवन करना एक जटिल काम हो सकता है। तो इसका हल निकालने के लिए हमने काफी सर्च किया और इंटरनेट पर काफी सर्च करने के बाद हमें डायबिक केयर जूस मिला जिस के अंदर इन सभी के गुण है।
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Source:
[1] www.careinsurance.com/blog/health-insurance-articles/benefits-of-jamun-seed-for-diabetics-in-hindi
[2] www.abplive.com/lifestyle/health/amla-is-useful-for-diabetic-patients-just-avoid-eating-it-at-this-time-2273302
[3] www.jagran.com/lifestyle/health-amla-benefits-for-diabetes-in-hindi-diabetes-ka-ilaj-kya-hai-22867788.html
[4] www.pharmeasy.in/blog/ayurveda-uses-benefits-nutritional-value-of-bitter-gourd-hindi/
[5] www.beatoapp.com/blog/what-are-the-important-benefits-of-tulsi-for-diabetes-patients/
[6] www.thehealthsite.com/diseases-conditions/diabetes/is-neem-good-for-diabetes-find-out-781985/
[7] www.pharmeasy.in/blog/ayurveda-uses-benefits-side-effects-of-bael/
[8] www.diabetes.co.uk/natural-therapies/fenugreek.html
[9] www.healthifyme.com/blog/giloy-for-diabetes/
[10] www.jagran.com/lifestyle/health-consume-to-control-sugar-and-weight-consume-panicum-antidotale-everyday-21475461.html
[11] www.freedomfromdiabetes.org/blog/post/gudmar-uses-and-benefits-in-managing-diabetes/2893
[12] www.food.ndtv.com/ayurveda/vijaysar-for-diabetes-how-to-use-this-ayurvedic-herb-to-manage-blood-sugar-levels-1896685